बुधवार, 8 अक्तूबर 2014

पशुता मर गयी !

(फोटो गूगल से साभार)



सुना है 
एक पशु की 
बलि दी  
मनुष्यों ने 

और 
उसके बाद 
मनुष्यों के भीतर का 
इंसान   
जाग उठा  
और  अंदर की 
पशुता 
मर गयी !



4 टिप्‍पणियां:

  1. पशुता कभी नहीं मरती
    बहत सटीक

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  2. कविता के शब्द-शब्द में सच्चाई है।

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  3. पशुता मरी होगी ऐसा लगता तो नहीं ... इंसान और इतना संवेदनशील ...

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