गुरुवार, 29 सितंबर 2016

टूट कर गिर जाएगा आसमां यह किसने कह दिया

(फोटो गूगल से साभार)


कुछ लोग बिहार को बहुत ही निम्न दृष्टि से देखते हैं और गाहे बगाहे कुछ ऐसे बयान दे जाते हैं जो काफी दुखदायी होता है।  आज बिहार की वर्तमान स्थिति भले उतनी अच्छी नहीं हो लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि हमेशा ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी।  समय के साथ सब बदलता है  और बिहार में भी सकारात्मक बदलाव आएँगे ऐसी मेरी आशा है।  दोस्तों मेरा पूर्ण विश्वास है कि एक समय आएगा जब लोग दिल से बोलेंगे कि 'बिहार है तो बहार है' :-)


अस्त हुआ सूरज कभी उगता नहीं 
यह किसने कह दिया 
टूट कर गिर जाएगा आसमां 
यह किसने कह दिया 

बुद्ध महावीर की धरा 
ज्ञान की मशाल जला 
जिसने विश्व को शून्य दिया
जिसके ऊपर विज्ञान चला 
विश्व कटोरे में जिसने 
ज्ञान अमृत भर दिया  
टूट कर गिर जाएगा आसमां 
यह किसने कह दिया 

विश्व विजेता सिकंदर की 
जहाँ रूहें काँप उठी
बिन लड़े ही जहाँ हारा वो 
चंद्रगुप्त की यह वीर भूमि 
वीर कुंवर सिंह जैसे अदम्य वीर ने  
जहाँ अंग्रेजों को धूल चटाया 
आजादी के शंखनाद को 
गांधी ने जहाँ आवाज उठाया  
यह अपराजित धरा 
अपराजेय ही रह गया  
टूट कर गिर जाएगा आसमां 
यह किसने कह दिया 

जिसने राष्ट्र को अपना 
पहला राष्ट्रपति दिया 
पहली लोकतंत्र की नींव  
जिस धरा पर रखा गया  
लोकनायक जयप्रकाश 
कर्पूरी की जन्मभूमि को
हर कोई नमन कर गया 
टूट कर गिर जाएगा आसमां 
यह किसने कह दिया

ऐसे अनगिन गाथाएं 
क्या क्या अब हम गिनाएँ 
जिसने देश के गौरव में 
जाने कितने चाँद लगाए
उस गौरवशाली धरा पे 
हम गौरवान्वित हुए जाएं
दिल से हर कोई जिसको 
कई सलामी दे गया 
टूट कर गिर जाएगा आसमां 
यह किसने कह दिया

अस्त हुआ सूरज कभी उगता नहीं 
यह किसने कह दिया 
टूट कर गिर जाएगा आसमां 
यह किसने कह दिया 




मंगलवार, 19 जुलाई 2016

मन श्रावणी हो उठा है जाग उठा फिर वृंदावन

(फोटो गूगल से साभार)


आँख मिचौली करता बादल
प्रिये, खेल रहा तेरी आँखों में 
अभी अभी बरसा है सावन 
लिपट सिमट तेरी बाहों में
दिन रात किनारे बैठे दोनों, देख रहे यह दृश्य मनभावन
मन श्रावणी हो उठा है, जाग उठा फिर वृंदावन 

बूँद बूँद प्रिये सजा रहा 
चूड़ी कंगन बिंदिया टिकुली 
मेघ घना बालों में उमड़ा
मेह सजी नथनी और बाली
श्रृंगार अनूठा शोभित मुखमण्डल, प्रीत भरे ये रीत नयन 
मन श्रावणी हो उठा है,जाग उठा फिर वृंदावन

मयूर पंख सा विस्तार लिए 
मन मगन आह्लादित है 
चंचला चपला कामिनी रमणी 
दिल देख प्रिये आनन्दित है 
टूट रहा अब हर बंधन जैसे, बँध रहे दो अंतर्मन 
मन श्रावणी हो उठा है,जाग उठा फिर वृंदावन



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