मंगलवार, 18 नवंबर 2014

बोलता पत्थर !


(फोटो गूगल से साभार)


कितनी ठोकरें खाई थीं
राह में पड़े थे जब 
किसी ने उठा 
रख दिया मंदिर में
और समय बदल गया है अब
  
जो मारते थे ठोकरें 
खुद पूजने आ गए
खाया था जिनसे चोट  
पैरों पर मेरे 'वो'
कितने फूल चढ़ा गए  !


11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब कहा है ! शिव नाथ ने

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के - चर्चा मंच पर ।।

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  3. यही अनुभव कभी कभी इंसानों को भी होता है. सुन्दर रचना.

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  4. इसी लिए कहते हैं समय बहुत बलवान होता है ... और हर किसी का समय आता है ...

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  5. अहा बहुत खूब रचना...
    वास्तविकता है.. समय से बड़ा बलवान कोई नहीं..

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  6. इसी लिए तो समय बलवान हैं
    http://savanxxx.blogspot.in

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  7. आपको सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ .....!!

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    1. आपको भी सपरिवार हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ ! :)

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  8. सुंदर भावाभिव्यक्ति... नए साल की हार्दिक शुभकामनाएँ...

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    1. धन्यवाद !
      आपको भी नववर्ष की शुभकामनाएँ व बधाई !

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