शनिवार, 28 जुलाई 2012

एक दुनिया माटी की !

                                     (फोटो गूगल से साभार)

माटी की छुलनी
माटी की कड़ाही
माटी का बेलन
माटी का चकला 
तवा माटी का
दल घोटनी माटी की
एक चूल्हा भी है
वो भी माटी का
एक पूरा घर
माटी का
सबकुछ
बस माटी का !

और इस घर में
कितनी खुशियाँ हैं
बसती यहाँ
एक पूरी दुनिया है
एक पूरी दुनिया
जहाँ रहती है
अपनी प्यारी सी मुनिया
वही मुनिया
जिसने अपने माटी सने
हाथों से
खुद रचा है
इस दुनिया को  
अपनी छोटी सी दुनिया
माटी की दुनिया
खुश है जहाँ
छोटी सी मुनिया
बहुत खुश !

अब मुनिया
हो गयी है बड़ी
अब पास उसके
माटी के बर्तन नहीं
चमकीले बर्तन हैं
माटी का घर नहीं
पक्के का घर है
बहुत कुछ है यहाँ
सबकुछ है
अब ये ही है
दुनिया उसकी
उसी  मुनिया की
जो हो गयी है बड़ी
पर थोड़ी सी चिंतित
थोड़ी व्यथित 
थोड़ी उदास ! 

32 टिप्‍पणियां:

  1. अब ये ही है
    दुनिया उसकी
    उसी मुनिया की
    जो हो गयी है बड़ी
    पर थोड़ी सी चिंतित
    थोड़ी व्यथित
    थोड़ी उदास !
    बिल्‍कुल सच कहा ... भावमय करती प्रस्‍तुति

    उत्तर देंहटाएं
  2. रोटी पकाती मुनिया कितनी प्यारी लग रही है..उतनी ही सुन्दर कविता भी..

    उत्तर देंहटाएं
  3. सारी खुशियाँ मिट्टी से जुड़ी ... सहज , स्वाभाविक ...
    जब सब मिल जाता है तो कुछ सहज सा खो जाता है

    उत्तर देंहटाएं
  4. बढ़िया प्रस्तुति सहज रूपांतरण की जो उदास करती है चित्र जितना तरंगित करता है रचना का अंत उतना ही उदास कर जाता है .

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (29-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  6. सत्य को सहज भाव में रचा है ...सुंदर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  7. @ डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री जी : चर्चामंच में शामिल करने के लिए धन्यवाद आपका !!

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  8. माटी का घर बना , सुन्दर लिया सजाय,
    एक दिन ऐसा आएगा,माटी में मिल जाय,,,,,,

    RECENT POST,,,इन्तजार,,,

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  9. जीवन के कुछ कोमल दृश्यों को शब्दों में सहेजती अच्छी कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  10. जीवन के कुछ कोमल दृश्यों को शब्दों में सहेजती अच्छी कविता। !.बहुत सार्थक प्रस्तुति. रफ़्तार जिंदगी में सदा चलके पायेंगें
    मोहपाश को छोड़ सही रास्ता दिखाएँ

    उत्तर देंहटाएं
  11. जिंदगी कि उतार चढ़ाव को,
    समझाती एक प्यारी सी कविता,............बहुत अच्छा.................

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  12. जिंदगी को दर्शाती एक प्यारी सी कविता...

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  13. माटी के खिलौने से बचपन याद आ गया, बहुत खूब...

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  14. हाथों से
    खुद रचा है
    इस दुनिया को
    अपनी छोटी सी दुनिया
    माटी की दुनिया
    खुश है जहाँ छोटी सी मुनिया
    बहुत खुश !

    बस यहीं तक .....मुनिया को मुनिया
    ही रहने देते तो रचना ज्यादा प्रभावी होती ....

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  15. रचना तो प्यारी है हे लेकिन गुडिया की तस्वीर बहुत अच्छी लगी। छोटी सी मुनिया --- जैसे भी हो अपनी राहें तलाश लेती है।

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  16. सब खेल माटी का है, अग पांव माटी पर रहे तो सब ठीक है किंतु जब माटी से पैर उठता है तो हवा में जगह नहीं मिलती।

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  17. आह..... माटी की कहानी को जीती कविता.....

    बहुत ही सुन्दर..

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  18. हृदयभावी बहुत सुन्दर
    कोमल भाव लिए रचना..
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  19. sochane par vivash kar diya bhai aapane.....umra ke saath kitna kuch kho jaata hai...vo kaagaz ki kashti wo baarish kaa paani....
    laajavaab rachna

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  20. मुनिया बड़ी हो गयी पर बर्तन नहीं छूटे ... गहरी रचना ...

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  21. Bahut hi gahri rachna ...dil ke bhavo ko chuu lene wali "muniya badi hi gai"

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  22. नन्ही सी- प्यारी सी कविता...

    इसके बाद का दर्द >> http://corakagaz.blogspot.in/2013/03/main-ek-mati-ki-murat.html

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