गुरुवार, 19 जुलाई 2012

कब भीगता हूँ 'अकेला'




मिली संजीवनी 
उस सावन को 
जो भीगा 
कल के सावन में 
सुप्त अंतर 
हुआ हरित 
मिलने लगा 
बूंद बूंद में गीत 

हाँ, वो ही गीत 
जो हम तुम 
अक्सर 
सावन में गाते 
और भीगे भीगे से 
अंजुरी में 
कितने सावन 
भर कर लाते

सच बोलूँ
तो भीगे भीगे 
सावन में 
तुझे संग संग 
जी लेता हूँ 
पास नहीं 
तो क्या हुआ 
सावन की 
इन बूंदों में 
दूरियों को 
पी लेता हूँ 

मुझे पता है 
तुम भी 
हो भीगी
कल रात में 
मैं कब 
भीगता हूँ अकेला 
सावन की 
बरसात में 
बताओ जरा 
कब भीगता हूँ 
'अकेला'
ऐसे बरसात में 
बताओ जरा !

39 टिप्‍पणियां:

  1. Jab Tum ehsaas mein Bhi Saath ho to ham akele Kahan .... Saavan ko jeete huve sundar rachna ...

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  2. बहुत-बहुत सुन्दर जब किसी का अहसास साथ होता है
    तो अकेलापन कैसा ...
    सुन्दर अहसास की रचना :-)

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  3. मन का पंछी दूर तक, उड़ उड़ वापस आय ।

    सावन की मनहर छटा, फिर भी मन तड़पाय ।

    फिर भी मन तड़पाय, साथ यादें ही आती ।

    सुन लो तुम चितलाय, झूल सावन जो गाती ।

    भीगे भीगे शब्द, करे हैं ठेलिमठेला ।

    रहा अधर में झूल, भीगता नहीं अकेला ।।

    ""बहुत है झूलने वाले "'

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  4. हाँ! शिवनाथ जी!
    आपका ये कविता तो बहुत ही अच्छा हैं हमें बहुत अच्छा लगा/
    साथ ही आपके कविता में जो कल के सावन की बूंदों का दृश्य हैं,
    बूंदों ने जो सबको जो भिगोंया !! वह सबको हमेशा याद आयेंगें//

    "वो आश्मां तुम कितने दूर भी हो पर हमेशा अपने मुशकुराहट की बूंदों की से हम-सब को भीगते रहे"

    उत्तर देंहटाएं
  5. "वो आश्मां तुम कितने दूर भी हो पर हमेशा अपने मुशकुराहट की बूंदों से हम-सब को भिगाते रहे"

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह ... भावमय करते शब्‍दों का संगम ... उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  7. अहसास अकेला नहीं रहने देता..

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  8. बहुत ही अच्छी.... जबरदस्त अभिवयक्ति.....वाह!

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  9. 'मानसिक कुहांसे को जब भी कागज पे उतारा है ,

    अक्स तेरा उभर आया है' .बढिया प्रस्तुति है बरसात में हमसे मिले तुम सजन, तुमसे मिले हम,बरसात में , ताक धिनाधिन

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  10. सच तो कह रहें हैं आप शिव!
    ''कोई अकेला कहाँ भीगता है.."
    तन भीगते ही, यादों के सावन में मन भीगने लगता है
    कागज़ की नावों के साथ साथ, बचपन से जवानी तक कितनी देह्लीजों
    पर क्या क्या भीगा, डूबा है सब याद आने लगता है!
    सच तो है.....
    भीगे सपनो को ठौर मिले, भीगी यादों का तर्पण हो
    और नयी यादें जुड़ जाएँ, इसीलिये आता है सावन!
    बहुत प्यारी कविता.

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  11. ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है

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  12. ..... खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

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  13. ये कविता नही एक कहानी हैं,
    जिसमे बसी यादे पुरानी हैं,

    उत्तर देंहटाएं
  14. सच बोलूँ
    तो भीगे भीगे
    सावन में
    तुझे संग संग
    जी लेता हूँ
    पास नहीं
    तो क्या हुआ
    सावन की
    इन बूंदों में
    दूरियों को
    पी लेता हूँ

    ....कोमल अहसास जगाती बहुत प्यारी रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  15. वो ना सही, उसका अहसास सही.
    खूबसूरत!
    आशीष
    --
    इन लव विद.......डैथ!!!

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  16. http://meourmeriaavaaragee.blogspot.in/2012/07/blog-post_22.html

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  17. बहुत सुन्दर और सार्थक सृजन , आभार.

    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारकर अपनी शुभकामनाएं प्रदान करें.

    उत्तर देंहटाएं
  18. सच बोलूँ
    तो भीगे भीगे
    सावन में
    तुझे संग संग
    जी लेता हूँ
    पास नहीं
    तो क्या हुआ
    सावन की
    इन बूंदों में
    दूरियों को
    पी लेता हूँ
    bahut sundar bhav, badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  19. प्रेमी को प्रेमिका की तदानुभूति कराती रचना .बधाई ....सावन को सावन के बरसने को ....बरसाने को कान्हा के ...

    उत्तर देंहटाएं
  20. हाँ, वो ही गीत
    जो हम तुम
    अक्सर
    सावन में गाते
    और भीगे भीगे से
    अंजुरी में
    कितने सावन
    भर कर लाते....

    Awesome creation !

    .

    उत्तर देंहटाएं
  21. bahut sundar aur dilkash....
    mere blog par aane ke liye shivnathji aapka shukriya.......

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  22. ये वो नमी है जो किसी की रिक्तता से जीवन में भर जाती है।

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  23. बहुत प्‍यारी कविता रची है आपने। बधाई।

    ............
    International Bloggers Conference!

    उत्तर देंहटाएं
  24. बहुत कोमल और सुंदर अभिव्यक्ति ...!!
    शुभकामनायें...!!

    उत्तर देंहटाएं
  25. बहुत बढ़िया प्रस्तुती, सुंदर मनमोहक रचना,,,,,

    आपकी पोस्ट पर पहली बार आया आना सार्थक रहा,,,,
    फालोवर बन गया हूँ आप भी बने तो मुझे खुशी होगी,,,,,

    RECENT POST काव्यान्जलि ...: आदर्शवादी नेता,

    उत्तर देंहटाएं
  26. कोमल से एहसासों से रची बसी सुंदर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  27. बहुत सुन्दर सावनी फुहार भरी प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  28. मुझे पता है
    तुम भी
    हो भीगी
    कल रात में
    मैं कब
    भीगता हूँ अकेला
    सावन की
    बरसात में
    बताओ जरा
    कब भीगता हूँ
    'अकेला'
    ऐसे बरसात में
    बताओ जरा !....सुंदर रचना.

    उत्तर देंहटाएं

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