गुरुवार, 4 सितंबर 2014

आखिर कौन था वो ?



(फोटो गूगल से साभार)



कभी कभी ठहर जाता हूँ 
आईने के सामने आकर 
मेरा प्रतिबिंब नहीं दिखता 
दिखता है कुछ और

तीन खीचीं लकीरें 
मेरे माथे पर 
और आँखों के नीचे 
सूनापन लिए गहरा अन्धकार 
कुछ और ही 
बोल रहा होता है 

इतना उदास सा चेहरा 
कब हुआ ऐसा !
पता नहीं चला 
और क्यूँ !
यह भी अज्ञात 

फिर आभास होता है मुझे  
कोई पीछे खड़ा है मेरे 
मुस्कुराता हुआ 
मेरे ऊपर  
(शायद 'मैं' ही हूँ )
मैं मिलता हूँ उससे 
और अब 
आइने में 'मैं' हूँ 
कोई और नहीं
.
.
आखिर कौन था वो ?


शनिवार, 9 अगस्त 2014

अटूट, अंतहीन, निश्छल प्यार !

राखी पर अपनी एक रचना फिर से साझा कर रहा हूँ  :)






इस दुनिया में सबसे प्यारा
भाई - बहन का प्यार है
और त्योहारों में सबसे पावन
राखी का त्योहार है

एक के आँखों में आँसू
दूजे के नयन छलकाता है
बहना जब होती उदास
भैया उसे हँसाता है

थोड़ी शरारत आपस में
थोड़ी सी होती तकरार
हर शरारत में छुपा होता
अनजाना अनोखा सा इक प्यार

भाई - बहन का रिश्ता ऐसा
जो हर सुख - दुःख आपस में बाँटे
एक के राहों का काँटा
दूजा अपने हाथों से छाँटे

रेशम के इक धागे से
बंधा भाई - बहन का प्यार
अटूट , अंतहीन , निश्छल है जो
प्यारा सुंदर सा ऐसा संसार
प्यारा सुंदर सा ऐसा संसार 


आप सभी को रक्षाबंधन पर्व के इस शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ !!

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...