गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

बालगीत: बारिश आई खुशियाँ लाई


 


मेढक बोला टर्र टर्र टर्र

बारिश का मौसम है सर

बोर हो गया हूँ पढ़-पढ़कर

जल्दी से अब छुट्टी कर


झींगुर ने भी दौड़ लगाई

सबने हाँ में हाँ मिलाई

चलो भाइयों मौज मनाएँ

हम सब बारिश में नहाएँ


मोरनी ने भी ली अंगड़ाई

अपने पंखों को फैलाई

हम सब मिलकर गाएँ भाई

बारिश आई खुशियाँ लाई


हाथी चाचा थक चुके हैं

आधे-पूरे पक चुके हैं

मूड फ्रेश करने अपनी वह

बारिश में निकल चुके हैं


चिड़ियों ने भी गाया गायन

मिलकर सारे भाई-बहन

चलें दूर करने अब टेंशन

बारिश का आया यह सीजन


(रचनाकार - शिवनाथ कुमार, गायक: शैलेन्द्र बी.कुरेच्या व Tanns)


शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

मैं एक फ़कीर हूँ

 (चित्र - ए आई निर्मित)

उदासी, निराशा, हर्ष, उल्लास
कई भाव, कई रंग हैं ज़माने में
ज़िंदगी खुद में एक नशा है
मिलकर देखो उससे, क्या रखा है पैमाने में

रात भले अँधेरी हो, पर वह शांत है
अलग ही मज़ा है दुःख को गले लगाने में
श्वेत और श्याम से सजी, एक साफ़ तस्वीर हूँ
सीधी-सादी बात करता हूँ, मैं एक फ़कीर हूँ

जो बीत गया, उस पर सोचने से क्या फ़ायदा
टूटते देखा है कई बार, खुद से किया वायदा
मिलती-बिछुड़ती ज़िंदगी की राहें अजीब हैं
टूट जाते हैं अक्सर, जब रिश्तों में ढूँढते हैं फ़ायदा

मन की बातें बेवजह ही भटकाती हैं
दिल की राहों में सुकून, तसल्ली है ज़्यादा
उन्हीं राहों पर चलता, एक पथिक, एक राहगीर हूँ
सीधी-सादी बात करता हूँ, मैं एक फ़कीर हूँ

दिखने वाली हर चीज़ ज़रूरी नहीं सच्ची हो
हर पल जो घटे, ज़रूरी नहीं कि अच्छी हो
बेवजह कुछ भी नहीं ज़िंदगी की राहों में
राहें चाहे कंटीली हों या फिर पक्की-कच्ची हों

उम्मीदों का आसमाँ, कर्म-पथ से मिलता है जहाँ
चलते रहो, मिल ही जाएगा, कोशिश यदि सच्ची हो
भ्रम की टेढ़ी-मेढ़ी नहीं, सच की सीधी लकीर हूँ
सीधी-सादी बात करता हूँ, मैं एक फ़कीर हूँ

 

(रचनाकार - शिवनाथ कुमार)

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