शुक्रवार, 20 मई 2016

पहला और दूसरा






पहला शांत है 
पर चेतन, जागृत
दूसरा अशांत है
उद्वेलित 

कोशिश कर रहा  
दूसरा  
पहले को परेशान 
करने की 

पर पहले को 
गुस्सा नहीं 
प्यार आ रहा  
दूसरे पर 

पता है पहले को  
कि दूसरा नादान है 
चंचल है 
यही सोच 
कोई प्रतिक्रिया नहीं 
बस शांत बैठा है पहला 

कुछ देर बाद 
दूसरा खुद शांत हो जाता है 
और पहला 
मुस्कुरा रहा होता है 
चुपचाप 

जो किसी ने पूछा
दोनों से 
परिचय उनका 
पहले ने बताया 'दिल'
दूसरे ने 'मन'





शनिवार, 26 दिसंबर 2015

राह दिखाएँ खुद को

(फोटो गूगल से साभार)



तमस में घिरते 
व्याकुल मन को 
देख रहीं 
अदृश्य निगाहें (मन की)
दीपक लेकर चलता कोई 
पर नहीं खुलती हैं 
बंद निगाहें 

सृजन और विध्वंस 
के मध्य 
दो पाटी में पीसता मन 
मन की व्याकुलता
बाँध ना पाया 
धरा की अपनी सीमाएँ 

निज मन में ही 
शक्ति अकूत 
बाँध सके जो खुद को 
घोर  तमस में दीप जलाए 
राह दिखाएँ खुद को 


LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...