मंगलवार, 28 जुलाई 2015

मुस्कुराएगा जो सदा


(फोटो गूगल से साभार)


वह तमाशबीन नहीं बना रहा 
औरों की तरह 
उठा और चढ़ गया आसमां पर 
बन कर सूरज चमकने लगा 

रात भर जहाँ नाउम्मीदी पसरी थी  
वहाँ नव ऊर्जा बन बहने लगा 
नव उत्साह लिए साँसों में 
बागों में महकने लगा 

बिना मुश्किलों से डरे 
चुनौतियों को हुंकार भरता  
हर कदम  हर सफर 
हर साँस हर डगर 
हर प्राण ओज भरता 

हर भेदभाव से परे 
सहृदय हर किसी से
मानवता का अर्थ गढ़ता 
एक पथ प्रदर्शक, मार्गदर्शक  
आदर्श की नव नींव रखता 
वो चलता रहा, बस चलता रहा 

वो कभी थका नहीं 
वो कभी झुका नहीं 
क्या कुछ वो गढ़ गया 
पर कभी रुका नहीं 

यह सूरज वह सूरज नहीं 
है अस्त जो हो जाता  
यह, वह सूरज है 
जो हर दिल में
है सदा उदित रहता
मुस्कुराता है सदा 
मुस्कुराएगा जो सदा  


शत शत नमन !!

शनिवार, 13 जून 2015

आधा मन

( फोटो गूगल से साभार )  


कदम दर कदम 
संग चलता है मेरे 
तुम्हारा  'आधा मन'

अक्सर हाथ की 
आड़ी तिरछी रेखाओं में 
ढूंढता हूँ तुम्हारा  
बाकी बचा 'आधा मन'

पर हर बार पाता हूँ 
कुछ अलग सा 
हाँ, बिलकुल अलग  … 
जैसे कुछ कपोल अरमां
और तल्ख़  धूप  में 
लिपटा एक टुकड़ा
बारिश का

मेरे माथे की तीन रेखाएँ 
आज भी जिक्र छेड़ती हैं तुम्हारा
अक्सर आधी रात को 
और आज भी बेवजह 
मुस्कुरा देती हैं 
तुम्हारे 'आधे मन' की 
उस मुस्कुराहट  से 

तुम्हारा भी 'आधा मन' 
कभी पूरा ना हो पाया 
हो सके तो ले जाओ 
अपना 'आधा मन'
ताकि तुम पूर्ण हो जाओ
या फिर दे जाओ 
बाकी बचा 'आधा मन '
ताकि 'हम' पूर्ण हो जाएँ

इसी इंतजार में 
प्रतीक्षारत 
तुम्हारा और सिर्फ तुम्हारा  
वही .... 'आधा मन' !




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