शुक्रवार, 8 मार्च 2019

नारी, तुमसे होता जग यह पूरा

(फोटो गूगल से साभार)



मंद समीर सी चलने वाली 
नदी सी कल कल बहने वाली 
जहाँ दिल दरिया और मन समंदर
करुणा और ममता का सागर 
तुम ना हो तो जग अधूरा
नारी, तुमसे होता जग यह पूरा

तुम माँ, तुम बहिनी
तुम बेटी, तुम अर्द्धांगिनी 
हर रूप तुम्हारा अद्भुत है
प्रेम, वात्सल्य, दया, त्याग
सब तुम्हारे पर्यायवाची
सब तुम्हारे ही रूप हैं 

तुम रानी लक्ष्मीबाई 
तुम राणा की पन्ना धाय
तुम चितौड़ की पदमिनी 
तुम वीरांगनी, तुम ओजस्विनी 

तुम इंदिरा सी नेतृत्व हो 
तुम कल्पना की उड़ान
तुम राष्ट्र शक्ति हो 
तुम देश का स्वाभिमान 

धरा से गगन तक
बस तुम्हारा विस्तार है 
नारी शक्ति, नारी संबल 
तुमको शत शत नमस्कार है !!


10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (10-03-2019) को "पैसेंजर रेल गाड़ी" (चर्चा अंक-3269) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  2. भाव और शब्द दोनों मापकों पर 'शक्ति' के प्रति एक सुदृढ़ रचना।

    जवाब देंहटाएं
  3. आवश्यक सूचना :

    सभी गणमान्य पाठकों एवं रचनाकारों को सूचित करते हुए हमें अपार हर्ष का अनुभव हो रहा है कि अक्षय गौरव ई -पत्रिका जनवरी -मार्च अंक का प्रकाशन हो चुका है। कृपया पत्रिका को डाउनलोड करने हेतु नीचे दिए गए लिंक पर जायें और अधिक से अधिक पाठकों तक पहुँचाने हेतु लिंक शेयर करें ! सादर https://www.akshayagaurav.in/2019/05/january-march-2019.html

    जवाब देंहटाएं
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    rishi.chauhan2003@gmail.com mail kare

    जवाब देंहटाएं
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