शुक्रवार, 20 मई 2016

पहला और दूसरा






पहला शांत है 
पर चेतन, जागृत
दूसरा अशांत है
उद्वेलित 

कोशिश कर रहा  
दूसरा  
पहले को परेशान 
करने की 

पर पहले को 
गुस्सा नहीं 
प्यार आ रहा  
दूसरे पर 

पता है पहले को  
कि दूसरा नादान है 
चंचल है 
यही सोच 
कोई प्रतिक्रिया नहीं 
बस शांत बैठा है पहला 

कुछ देर बाद 
दूसरा खुद शांत हो जाता है 
और पहला 
मुस्कुरा रहा होता है 
चुपचाप 

जो किसी ने पूछा
दोनों से 
परिचय उनका 
पहले ने बताया 'दिल'
दूसरे ने 'मन'





7 टिप्‍पणियां:

  1. असमजश सही है दिल और मन का। .... थोड़ा और निखरा जा सकता है. ..

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (22-05-2016) को "गौतम बुद्ध का मध्यम मार्ग" (चर्चा अंक-2350) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    बुद्ध पूर्णिमा की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  3. दिल दिमाग की कशमकश को बाखूबी शब्द दे दिए हैं ...
    बहुत लाजवाब रचना ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत खूब। बहुत शानदाार और प्रभावी रचना की प्रस्‍तुति।

    उत्तर देंहटाएं

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