शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

खुशनसीब हैं वो जो दर्द में मुस्कुराते हैं

(फोटो गूगल से साभार)


आँधियों में अक्सर पत्ते टूट जाते हैं 
खुशनसीब हैं वो जो दर्द में मुस्कुराते हैं 

डूब जाता है सूरज दिन के किनारे पर 
चाँद तो अक्सर रात में ही देखे जाते हैं 

हर राह हो फूलों से सजा जरुरी नहीं 
काँटों से होकर भी मंजिल को पाते हैं  

क्या कुछ नहीं निकलता है  मंथन से 
भोले हैं वो जो विष पीकर भी जी जाते हैं

जमीन से जुड़ा रहना बहुत जरुरी हैं 
उड़ते पक्षी सुस्ताने फिर नीचे ही आते हैं 




15 टिप्‍पणियां:


  1. जमीन से जुड़ा रहना बहुत जरुरी हैं
    उड़ते पक्षी सुस्ताने फिर नीचे ही आते हैं ................गजब।

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  2. बहुत खूब कहा है-- खुशनसीब हैं वो जो दर्द में मुस्कुराते हैं

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  3. जमीन से जुड़ा रहना बहुत जरुरी हैं
    उड़ते पक्षी सुस्ताने फिर नीचे ही आते हैं

    ........बेहद सशक्‍त पंक्तियां ..!

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  4. आँधियों में अक्सर पत्ते टूट जाते हैं
    खुशनसीब हैं वो जो दर्द में मुस्कुराते हैं

    bahut khoob ....!!

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  5. जमीन से जुड़ा रहना बहुत जरुरी हैं
    उड़ते पक्षी सुस्ताने फिर नीचे ही आते हैं ........बहुत खूब

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  6. बहुत सुंदर .... मेरी कविता समय की भी उम्र होती है पर आपका स्वागत है।

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  7. meri pangantiya
    aandihyon me akshar patte thut jate hai
    wo nasib wale hote hai jo jamin ka charan sparsh kar apne uchanyon par phir chale jate hai

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  8. बहुत सुंदर कविता .......सशक्त लेखन !!

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  9. हर राह हो फूलों से सजा जरुरी नहीं
    काँटों से होकर भी मंजिल को पाते हैं ..


    सच कहो तो मंजिल का मज़ा भी तभी आता है जब काँटों से निकल कर मिली हो ...
    लाजवाब शेर ...

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  10. हर राह हो फूलों से सजा जरुरी नहीं
    काँटों से होकर भी मंजिल को पाते हैं
    लाजबाब,प्रस्तुति...!
    RECENT POST -: पिता

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत ही बेहतरीन रचना...
    लाजवाब....
    :-)

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