भीगी पलकों से
उनकी मुस्कुराहटें
गीली हो चली
खामोशी और मौन में
भीगता रहा दो मन
बड़ी देर तलक
दिल की सारी शिकायतें
सारे गिले शिकवे
बह गए कहीं
रात के
आसमां पर
काले बादल थे
बस थोड़ी देर पहले
अभी चाँद
उफ़क़ कर
आ गया है वहाँ
मुस्कुराते हुए
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| (फोटो गूगल से साभार) |
कितनी ठोकरें खाई थीं
राह में पड़े थे जब
किसी ने उठा
रख दिया मंदिर में
और समय बदल गया है अब
जो मारते थे ठोकरें
खुद पूजने आ गए
खाया था जिनसे चोट
पैरों पर मेरे 'वो'
कितने फूल चढ़ा गए !