रविवार, 20 अप्रैल 2014

खाली कर दूँ अपनी पूरी शाम !

(फोटो गूगल से साभार)




जी करता है 
पैमाने में भर लूँ  जाम 
खाली कर दूँ 
अपनी पूरी शाम !

अब कोई बात ना रहे 
कहने को 
कोई बादल ना उमड़े 
बरसने को 

कि काश मैं रोक पाऊँ 
बहते मन को 
दे सकूँ कोई मोड़ नया 
जीवन को 

लौटना मुश्किल 
जो बढ़ गया आगे 
बँधता हूँ, बँधता हूँ 
बाँध रहे कितने धागे 

दिन उतरता है 
रात चढ़ता है 
पर शाम ठहरा रहता है कहीं 
मेरे संग, मेरे अंदर  

आखिर क्यों समझ से परे 
जीवन का यह आयाम !
जी करता है 
पैमाने में भर लूँ जाम  
खाली कर दूँ 
अपनी पूरी शाम !





शुक्रवार, 14 मार्च 2014

उनकी आँखों में कई बातें हुआ करती हैं

(फोटो गूगल से साभार)

उनकी आँखों में कई बातें हुआ करती हैं 
थोड़ी ही सही मुलाकातें हुआ करती हैं 

नींद उनको भी कहाँ आती है आँखों में 
ख्यालों में डूबी दो रातें हुआ करती है 

तन्हाई में अक्सर वो गीत गाते हैं कोई 
घुलती चाँदनी में इबादतें हुआ करती हैं

टूट कर तारा कोई गिरता है दामन में 
मानो ना मानो ये करामातें हुआ करती हैं 

लहर दरिया का बन दौड़ता है मेरे अंदर 
मासूम जो आपकी ख्यालातें हुआ करती हैं 


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