मंगलवार, 15 जनवरी 2013

तुझे खाक खाक कर सकते हैं !

(फोटो गूगल से साभार)


हमें कोई कमजोर ना समझे
हमने लिखे कई अफ़साने हैं
अखंड भारत को ललकारा जब जब
जान पर खेले कई दीवाने हैं

बांग्लादेश से कारगिल तक
अरे ! कितनी बार धूल चटाई है
फिर भी तेरी, ओ नादान !
अक्ल ठिकाने नहीं आई है

तेरे अंदर बहता है पानी
देखी तेरी कई नादानी
दौड़े लाल रक्त हममें
हर पल सुनाता शौर्य कहानी

बर्बरता की परिभाषाएँ
हम क्षण में ही बदल सकते हैं
चिंगारी मत लगा
आग लगा उलटा तुझे
खाक खाक कर सकते हैं

इतिहास उलट कर देख ले
तुझे तेरा चेहरा दिख जाएगा
अपनी हद में रहना सीख
हरदम मुँह की खाएगा
और जो नहीं बदल सका खुद को
तो दिन दूर नहीं
जब धरती के नक़्शे में
तू खुद को ढूँढता रह जाएगा 


भारत के वीर सपूतों को शत शत नमन !
जय हिन्द !

शनिवार, 12 जनवरी 2013

भीगी सी एक बूंद ओस !

(फोटो गूगल से साभार)
ओस की एक बूंद
विश्रांत
बैठी हुई
घास की फुनगी पर
रात भर जीया जिसने
एक जिन्दगी चाँदनी

सुबह की पहली किरण
झाँक रही आर पार उसके
पारदर्शी होता हर कुछ
उसकी पूरी जिन्दगी

जो भेद गयी किरणें
फूट निकला इन्द्रधनुषी रंग
अल्प जिन्दगी की संपूर्णता में
भीगी भीगी
मूक सजीव बनी वो
अभी भी झूल रही कैसे
देखो कितने इत्मीनान से !

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