मंगलवार, 15 जनवरी 2019

जिंदगी तेरा मेरा रिश्ता बड़ा अजीब है

(फोटो गूगल से साभार)


जिंदगी तेरा मेरा रिश्ता बड़ा अजीब है
कभी तुम मुझे देख कर हँसती  हो 
तो कभी मैं तुम्हें देख कर हँसता हूँ 

संग संग तुम्हारे चलना बड़ा अनोखा है
कभी तुम मेरे पीछे होती हो 
कभी मैं तुम्हारे पीछे होता हूँ 

तुम हो क्या, समझना मुश्किल है जरा 
हर रूप अलग सा है तुम्हारा 
हर पल तुम संग विचित्रताओं से भरा  

तुम अहसास हो कभी, तो कभी आभास हो
तुम नीम हो कभी , तो कभी मिठास हो
बेशक एक पहेली हो, पर मेरे लिए ख़ास हो 

जिंदगी, हम तुम सदा ऐसे ही लड़े झगडे
हँसे हँसाएँ आपस में और कभी रूठे मनाएँ
पर साथ अनूठा बना रहे, ऐसे ही बस चलते जाएँ



12 टिप्‍पणियां:

  1. तुम अहसास हो कभी, तो कभी आभास हो
    तुम नीम हो कभी , तो कभी मिठास हो
    बेशक एक पहेली हो, पर मेरे लिए ख़ास हो...
    सुंदर रचना हेतु शुभकामनाएं आदरणीय शिवनाथ जी।

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  2. बहुत खूब ...
    जिंदगी पे अनेक पहलू होते हैं ... समय के साथ कभी आगे कभी पीछे चलना ही रीत है ... जीवन इसी से परिपक्व होता जाता है ...
    सुन्दर रचना है ...

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  3. अक्सर कुछ रचनाएँ अन्तस्थ को प्रभावित कर जाती है मन के भावों को शब्दों पिरोना आपको बखूबी आता है शिवनाथ जी........ ढेरों शुभकामनायें ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. संग संग तुम्हारे चलना बड़ा अनोखा है
    कभी तुम मेरे पीछे होती हो
    कभी मैं तुम्हारे पीछे होता हूँ ....
    बहुत-बहुत सुंदर रचना, जीवन के बेहद करीब से गुजरती हुई ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन राष्ट्रीय मतदाता दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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