गुरुवार, 29 अक्तूबर 2015

अनमोल उपहार

रात के ११.४५ बजे हैं और मोबाईल पर एक नाम फ़्लैश हो रहा है - रोहित ... कॉलिंग ।  संध्या अभी तक जाग रही है । भला मेट्रो सिटीज में रात को इतनी जल्दी कौन सोता है । कुछ सोच रही थी संध्या और और कुछ देर पहले व्हाट्स एप पे उंगलियाँ टाइम पास कर रही थी । फेसबुक पर अभी अभी एक स्टेटस डाला था और १० मिनट के अंदर १३ कमेंट्स ४७ लाइक्स आ चुके हैं । मोबाईल साइलेंट मोड में रख थोड़ा बालकनी में मेंटल स्ट्रेस कम करने के लिए सिगरेट के धुएँ उड़ाए जा रही थी । या यूँ कहे की अब यह उसकी रोज की आदत बन चुकी है । बिना सिगरेट के नींद कहाँ आती है । आदत से लग गयी है उसको । रोहित .... कॉलिंग अभी तक स्क्रीन पर फ़्लैश हो रहा है । ३ मिस्ड कॉल और उसके बाद मोबाइल भी चुप हो गयी । सिगरेट के कश लेने के बाद संध्या ने मोबाइल की चुप्पी तोड़ी । ' ३ मिस्ड कॉल्स .... रोहित '  देख संध्या ने मोबाइल के बटन दबाए ।  थोड़ी ही देर में रोहित की मोबाइल की घंटियाँ बजने लगी । रात के लगभग १२.३० बज चुके हैं । ' क्या हुआ रोहित, क्यों कॉल किया अभी …… मैंने तुम्हें मना किया था ना, कॉल नहीं करने को, फिर क्यूँ  किया कॉल ' - संध्या कुछ ज्यादा ही सख्त लहजे से बोली । ' अरे संध्या मेरी बात तो सुनो, तुम ऐसा कैसे कर सकती हो …… तुम समझने की कोशिश क्यूँ नहीं करती .... संध्या आई रियली लव यू ' - और ये बोलते बोलते रोहित की आवाज बैठ सी जाती है । 'बट .... आई डोन्ट लव यू  एंड आई नेवर लव्ड यू , ये तुम्हारी ग़लतफ़हमी है रोहित  ....  ' । 'तुम्हे मेरी बात बुरी लग रही होगी  पर सच्चाई यही है कि हमलोग एक अच्छे दोस्त हो सकते हैं पर एक अच्छे लाइफ पार्टनर नहीं ', संध्या यह कहते हुए चुप हो जाती है। 'क्यूँ  नहीं हो सकते एक अच्छे लाइफ पार्टनर , आखिर क्या कमी है मुझमें, पढ़ा लिखा हूँ और एक अच्छी जॉब है मेरे पास और दिखने में भी उतना बुरा नहीं हूँ  और मैं तुम्हें यकीन दिलाता हूँ कि तुम्हें बहुत खुश  रखूँगा ' , रोहित पूरी तरह से आवेग में बहा जा रहा था । संध्या बीच में ही टोकती हुई  .... 'रोहित ऐसी बात नहीं है, मुझे पता है कि तुम एक अच्छे दोस्त ही नहीं एक अच्छे इंसान भी हो , लेकिन सच बोलूँ रोहित तो मैं तुम्हारे काबिल नहीं , आखिर तुम्हें मेरी बुराईयाँ क्यूँ नहीं दिखती  … तुम  .... तुम एक सीधे सादे इंसान हो जिसे किसी चीज की बुरी लत नहीं है और मैं एक ऐसी लड़की हूँ जो दिन रात शराब और नशे में धुत रहती है …… तुम और मुझमे ऐसा क्या है जो हमें एक कर सके ' , और यह बोलते हुए एक खामोशी कुछ सेकंड्स के लिए खींच जाती है दोनों के बीच । रोहित ने चुप्पी तोड़ते हुए बोला ' प्यार … 'प्यार' है हम दोनों के बीच जो हमदोनों को एक कर बांधे रखेगी  .... और तुम संध्या , तुम्हें अपनी अच्छाई क्यों नहीं दिखाई देती  …… माना कि तुम्हें नशे की आदत है और इसकी वजह से यदि तुम मुझसे दूर रहना चाहती हो तो यह गलत है  … विश्वास मानो संध्या मैं जहाँ तक तुम्हें जानता हूँ तुम मेरे लिए सबसे बेस्ट हो '। ' याद है मैं एक बार तुम्हारे साथ पार्क गया था और तुमने वहां एक गरीब बच्चे को अपनी गोद में ले उसका माथा सहलाया था और फिर उसे एक आइसक्रीम खरीद कर दी थी और वो बस तुम्हे स्नेह भाव से देखता रहा था ,,,, मैं उस संध्या को पाना चाहता हूँ ' । ' और तो और उस दिन अस्पताल में तुमने उस गरीब को अपने पर्स के सारे पैसे निकाल कर दे दिए थे जो अपनी बेटी के इलाज के लिए वहां आया था पर उसके पास पैसे की कमी हो चली थी ' । ' संध्या मैंने तुममें ऐसी कितनी ही अच्छाईयां देखी है और सबसे बड़ी अच्छाई कि आज भी तुम मेरे भले के लिए मुझे ठुकरा रही हो ' । ' संध्या नशे की आदत आज ना कल छूट जाएगी पर अगर मैंने तुम्हें छोड़ दिया तो फिर ऐसा होगा जैसे मैंने ऊपर वाले से मिले एक अनमोल उपहार को छोड़ दिया है ' । ' संध्या तुम मेरे लिए एक अनमोल उपहार हो  .... प्लीज तुम ऐसा मत सोचना कि बस मैं तुम्हें पाने के लिए कुछ भी बोले जा रहा हूँ ,,, ये मेरे अंदर की सच्चाई हैं संध्या ,,,, प्लीज तुम ना मत बोलो ' । संध्या यह सब खामोश सुने जा रही थी ,,, बिलकुल खामोश और फिर उसने कहा - 'चलो रोहित बहुत बोला,, जा कर सो जाओ और मुझे भी नींद आ रही है ' ।  फिर रोहित ने टोकते हुआ कहा , 'पर  .... कुछ तो बोलो  … ' ।  रोहित के कुछ बोलने से पहले संध्या ने कॉल कट किया और बिछावन पर लेट कुछ सोचने लगी ।  ' रोहित … कालिंग ' स्क्रीन पर फिर से फ़्लैश हो रहा है ।  थोड़ा मुस्कुरात हुए संध्या ने कॉल कट किया और आँखें बंद कर कुछ सोचते हुए अपनी पलकें बंद कर नींद का इंतजार करने लगी  … । 

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (31-10-2015) को "चाँद का तिलिस्म" (चर्चा अंक-2146) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत अच्छी लगी आप की रचना । मेरी ब्लॉग पर आप का स्वागत है ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर कहानी शिवनाथ जी..
    संध्या की मुस्कान के साथ हम भी मुस्कुरा लिए,,,
    सुन्दर.
    :-)

    उत्तर देंहटाएं

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...